हमारे देश में गेहूं एक प्रमुख खाधान्न फसल है इसके साथी साथ यह देश की खाद्य सुरक्षा का आधार भी है

Writer By kartik

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देश में गेहूं की खेती लगभग 30 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाई जाती है इसके लगभग 98.38 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष हुआ है

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अन्य फसलों के साथ-साथ गेहूं की फसल में लगने वाले खतरनाक रोग एवं उनके नियंत्रण उपाय के बारे में जानेंगे

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रतुआ रोग कई प्रकार के नाम से जाना जाता है जैसे पीला रतुआ, भूरा रतुआ, काला रतुआ के नाम से जाना जाता है

रतुआ रोग

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गेहूं का यह रोग आसटीलैगो न्यूडा नमक कवक से होता है यह बी के पूर्णरूप से संक्रमित होने के कारण होता है

खुला कंड

ये हवा से उड़कर अन्य स्वास्थ्य बालियों में बना रहे बीजों को भी संक्रमित कर देती हैं

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गेहूं में लगने वाले इन खतरनाक रोगों को नियंत्रित करने के लिए आजकल मुद्रा उपचार अधिक लाभकारी तथा उपयोगी पाया गया है

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पीला रतुआ की रोकथाम के लिए प्रॉपीकोनाजॉल (टिल्ट 25 ई.सी.) का 0.1 प्रतिशत घोल या टेबुकोनेजोल 250 ई.सी. का 0.1 प्रतिशत की दर से घोल कर छिड़काव करें।

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इससे रतुआ रोग के साथ-साथ पर्ण झुलसा या चूर्णी फफूंदी (पाउडरी मिल्ड्‌यू) रोग भी नियंत्रित हो जाते हैं। 

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'सिरियल सिस्ट निमेटोड' के नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से कार्बोफ्यूरॉन 3 जी. का 1.5 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से या कार्बोसल्फान 25 ई.सी का छिड़काव करें।

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